पढ़ी हुई कहानियां अब कोई नहीं पढता..

आज भी मुड़े हुए होंगे

याद की किताब के कुछ पन्ने

पर पढ़ी हुई कहानियां अब  कोई नहीं पढता.

मेसेज डिलिट कर दिए जाते हैं

सिस्टम फोर्मेट कर लिया जाता है .

ई-किताबों के दोर में

रिश्ते एहसास द्वारा नही

निजी सहुलियत की कसोटी पर तय होते हैं.

जिनमें बिस्तर की चादर बदलने के साथ

जिस्मो की खुशबुएँ भी बदल जाती हैं

जुस्तजू ,चाहतें, आरज़ुएँ भी बदल जाती हैं.

गये वक़्त की किताब में

मुड़े हुए पन्ने पढने का वक़्त

किसके पास है आज

पढ़ी हुई कहानियां अब कोई नहीं पढता.. 

Advertisements

आसमान…..

जो बसा है हर कहीं, वो वहाँ रहता है

ज़मीन के ऊपर,एक आसमाँ रहता है

न सूरज को पता,न चाँद को मालूम

उजाले को उगाने वाला, कहाँ रहता है

उस छत को, दीवारों की ज़रूरत नहीं

वो नाम वाला, बे-नामोनिशाँ रहता है

लोट कर नहीं आया, रूठ जाने वाला

मैं ही जाऊंगा कभी, वो जहां रहता है

आस्मा जब गिरता है, ज़मी पे आलम

मकीं रहता है, ना फिर मकाँ रहता है  

मकीं-वासी, मकाँ-निवास