अनसुलझी पहली

भीड़ के बेहद इस शोर में

कोयल की उन्मुक्त कूक

सुनने की आस है फ़िज़ूल.

बेहतर है कहीं अपने भीतर

सामवेद स्वरलहरी तलाश.

तुझ पर खुल सकता है

आवाजों का तलिस्म,

तितली के रेशमी परों की

सरसराहटह का गीत.

कली के चटखने की सदा में

छिपा फूल खिलने का राज़.

चमन में तमाशाइयों के पावों तले

कुचली गयी

चरमराती सूखी पत्तियों की वेदना

ज़रूर कुछ समझा सकती है तुझे.

देख तो सही आवारा भवंरे केसे

पुष्पों के आनन पर

प्रेम कहानियाँ लिख रहे है.

गोर से सुनने का प्रयास कर,

क्या पता गहरे नीले आकाश तले

तुझ पर बयान हो जाए,DSCN2726

ऊँची डाल पर गाते पंछी का वह नगमा

जो अभी तक

किसी सुर में ढला ही नहीं है .

पश्तूनवाली–पठानों की आदिकालीन आचार संहिता

                                पश्तूनवाली–पठानों की आदिकालीन आचारसंहिता

पख्तूनवाली अथवा पश्तूनवाली का शाब्दिक अर्थ पश्तूनो का तरीका है.यह पठानों की आचार संहिता व उनकी जीवनशैली का अभिन्न अंग है.पख्तूनवाली का पालन पठानों द्वारा करीब पिछले पाँच हज़ार सालों से किया जा रहा है.इसका इस्लाम के साथ कोई मतभेद नहीं है.अगर कुरान शरीफ उनके लिए आखिरत सुधारने का सामान है तो पश्तूनवाली उनके दुनियादारी सम्बन्धी सभी मसाइल का हल है.पश्तूनो के अपने नियम हैं जिनका पालन हर सूरत में होना चाहिए चाहे जान की बाज़ी लग जाय. ये सोच उस समाज की है जिसकी कबीला प्रथा आदिकाल से आज तक जीवित है.उसका मुख्य कारण पश्तूनवाली ही है जो उन्हें बिखरने से रोकती है.पश्तूनवाली में दस नियम हैं जो पठान जीवन शेली को संयमित रूप से संचालित करते हैं.

१.मेलमस्तिया- मेल1024px-Afghan_provincial_governors_front_rowमस्तिया का अर्थ मेहमान नवाजी(अतिथि सत्कार) होता है .अपने सभी आगंतुकों के प्रति मेहमान नवाजी और इज्ज़त नवाजी, वे चाहे जिस देश ,धर्म,रंग नस्ल अथवा जाति के हों अफ़ग़ान बिना किसी बदले की अपेक्षा किये मेहमान की खिदमत करता है.अफगानों की मेहमाननवाजी सीमा रहित है.

२.ननवातई -.ननवातई का अर्थ आश्रय से होता है इसका शाब्दिक अर्थ भीतर जाने से है. इस नियमानुसार आश्रय में किसी व्यक्ति को उसके दुश्मन से हर कीमत पर बचाया जाता है यदि वह क़ानून का भी भगोड़ा है तो पनाह में आने पर उसे रखा जाता है जब तक की उसका संकट दूर न होजाए. नानावताई तब भी लागू हो सकता है जब झगडे में विजित व्यक्ति विजयी के घर जाकर क्षमा मांगले और शरणागत हो जाए. इसकी जीती जागती मिसाल अमेरिका का सेनिक मरकुस लुटेरील है जिसे एक अफ़गान काबिले ने शरण में आने पर बचाया था. उसके सभी साथी तालिबान द्वारा घात लगा कर मार दिए गये थे और वह घायल था. सबरे कबीले ने उसे शरण में रखा और उसका बचाव किया जबकि वह दुश्मन था.कई बार ऐसा लगता है कि ओसामा बिन लादेन भी ननवातई की वजह से ही काफी वक़्त अफगानिस्तान में सुरक्षित पनाह ले सके और सकून से रह सके .

३.तूरेह – तूरेह का अर्थ वीरता से होता है.एक पश्तून सदेव बहादुरी से अपने अबरू की रक्षा करता है .वह रक्षा करता है अपनी धरती की,अपनीं सम्पति की, अपने परिवार की और सर्वोपरी स्त्रिओं की किसी भी प्रकार के खतरे से.वह बहादुरी से हर गद्दारी की विरुद्ध खडा होता होता है और अपने नाम की आबरू के लिए मर मिटने को तय्यार रहता है.यदि कोई इस नियम के उल्लंगन का कसूरवार हो तो अफ़गान रीति अनुसार उसकी सीधी सज़ा मोत है.

४.सबत – सबत का अर्थ वफादारी से होता है.अपने परिवार,मित्रों और काबिले के प्रति वफादारी पख्तून के लिए जीवन का आवश्यक अंग है. इस शर्त से पठान कभी बेवफा नहीं हो सकता .क्यों की यह उनके परिवार और स्वयं की लिए शर्मिंदगी का कारण बन सकता है.पठान शर्मिदा होने से मरना बेहतर समझता है.

५.बदल – बदल का अर्थ बदला से है जो न्याय इन्साफ से लिया जाता है.आँख के बदला आँख जान के बदले जान. बदल की मूल धारणा इन्साफ की तलब और ज़ालिम से उसकी नाइंसाफी का बदला लेने की क्रिया पर यह नियम आधारित है .इस बदला लेने की कोई समय सीमा निश्चित नहीं है.अफ़ग़ान बहुत भावुक होता है इसलिए उसके लिए ज़ुल्म और इन्साफ की सीमा भी बड़ी और लगभग अंतहीन है.यहाँ तक के एक साधारण आम मज़ाक में किया गया व्यंग को भी निजी बेईज्ज़ती समझा जा सकता है. जिसका बदल ताना या व्यंग कसने वाले के खून बहाने तक में हो सकता है. सुप्रसिद्ध अफ़गानविद एल्फिनस्टोन का कहना है “एक पश्तून ज़रूर जुर्म को रोकता है चाहे उसके लिए खुद ख़त्म हो जाए”. बदला जिससे लिया जाना है यदि वह पहुच से बाहर है तब उसके स्थान पर रिश्ते में सबसे नजदीक पुरुष को सज़ा भुगतनी पड़ती है. बदल के कारण लोगों या क़बीलों में खूनी जंग पीडीयों तक जारी रह सकती है. जिसके भुगतान स्वरूप सेकड़ों जानो का नुक्सान संभव है और हुआ भी है .अफगानों के पुरुष प्रधान समाज में इस खूनी झगड़ों का निबटारा कई प्रकार से किया जा सकता है. मारने का बदल मार कर होता है मगर नानावती और जिरगा से इसमें दुश्मन को छूट संभव है .इस पश्तून कहवत से इस समाज में बदले का महत्व समझा जा सकता है कि “मैंने सो साल के बाद अपना बदला लिया और लोग कहते है मैंने जल्दी की.

६.ईमानदारी – ईमानदारी का अर्थ ईमान और भलाई से होता है एक पठान सदेव गुफ्तार और किरदार का गाजी होता है .वह सबके प्रति अच्छे विचार रखता है. भला कहता है और भला करने की सोचता है.पश्तून पड़ोसियों , पशु-पक्षियों और अपने माहोंल के प्रति सदा से सजग है.किसी को भी अकारण नस्ट करना पश्तूनवाली के विरुद्ध है.

७. इस्तेकामत – इस्तेकामत का अर्थ खुदा में भरोसा से होता है पश्तूनवाली तोहीद में विश्वास रखती है यह इस्लामिक सिद्धांत कि अल्लाह एक है पठान की रग ओ जान में बसा है वह एक अल्लाह के मानने वाला है.

८.गेरत – गेरत का अर्थ होसले, आत्मस्वाभिमान से होता है. पश्तून को हमेशा होसला दिखाना चाहिए.उनका आत्मस्वाभिमान जो घमंड किसी सूरत नहीं है एहसास का दमकता एक हार है, पठान का गहना है जिसने समाज को शोभायमान कर रखा है.अपनी इज़्ज़त पर किसी तरह दाग़ नहीं लगने देना चाहिए यह विचार उनकी रग–रग में रचा बसा है .वे खुद अपनी इज्ज़त के साथ दूसरों की भी आबरू रखते हैं.ख़ास तोर पर उनकी जिन्हें वे जानते तक नहीं हैं.पठान की गेरत उसके घर से शुरू होकर रिश्तेदारों और क़बिले के हर व्यक्ति तक पहुंचती है. जिसमें गेरत नहीं वह पश्तून भी नहीं है यह सोच कोम की है.

९.नामूस – नामूस का अर्थ महिलाओं की इज्ज़त से होता है एक पठान किसी भी सूरत में हो औरतों की इज्ज़त का रखवाला है.वो अपनी जान दे सकता है. मगर अपने सामने किसी ओरत को पहुचाई गयी ज़बानी या जिस्मानी तकलीफ को सहन नहीं कर सकता.

१०. नंग -एक पठान को हमेशा कमजोर का रखवाला होना चाहिए .चाहे वो उसके गिर्द किसी भी तबके से हो एक अफ़गान हमेशा कमजोर का मददगार होता है.

पश्तूनवाली के उपरोक्त लिखित मुख्य बिन्दुओं को समाहित करते हुए कुछ अन्य महत्वपूर्ण सिद्धान्त भी पठानों के हैं

(क)  आज़ादी:- शारीरिक, मानसिक, धार्मिक रूहानी, राजनीतिक व आर्थिक आज़ादी. उस समय तक जब तक कि यह दूसरों को नुकसान ना पहुंचाने लगे.

(ख) न्याय व माफ़ करना- अगर कोई जानबूझ कर गलत काम करे व गलती करने वाले ने यदि माफ़ी नहीं मांगी तो ख़ून के बदले ख़ून आंख के बदले आंख दांत के बदले दांत के अनुसार बदला जब तक ना लिया जाये, पठान पर यह एक क़र्ज़ा रहता है. यहां तक कि यह उस पर एक बन्धन है कि उसे ऐसा करना ही होगा. चाहे वह पठान स्त्री हो या पठान पुरुष्.

(ग) वादा पूरा करना-एक असली पठान कभी भी अपने वादे से मुकरेगा नहीं.जान भी देनी पड़े तो उस कीमत पर भी पठान वादा पूरा करता है.

(घ) एकता व बराबरी- चाहे पठान कोई भी भाषा बोलते हों, चाहे किसी भी क़बीले के हों, चाहे ग़रीब हों या अमीर पख़्तूनवली सारी दुनिया के पख़्तूनों या पठानों को एक सूत्र में बांधती है. हर इन्सान बराबर है यह पश्तूनवली का मूल सिद्धान्त रहा है

(ड) सुने जाने का अधिकार- पठान चाहे किसी भी क़बीले के हों, ग़रीब हों या अमीर हर एक को यह अधिकार प्राप्त है कि उसकी बात समाज में व जिर्गा में सुनी जाये।

(च)परिवार व विश्वास- चाहे पख़्तून हज़ार क़बीलों में ही बंटे क्यों ना हों यह मानना है कि हर एक पख़्तून स्त्री व पुरुष अन्य पख़्तूनों का भाई व बहन है.पख़्तून एक परिवार है.सभी पख़्तून परिवारों के स्त्रियों, बेटियों, बड़े बुज़ुर्गोंकी इज्ज़त का ख़्याल हर हाल में रखा जाना ज़रूरी है.

(छ) सहयोग- ग़रीब व कमज़ोरों की मदद की जानी चाहिये वह भी इस प्रकार से कि किसी को मालूम भी ना पड़े.

(ज) इल्म या ज्ञान प्राप्त करना- पख़्तून को ज़िन्दगी, इतिहास, विज्ञान, सभ्यता, संस्कृति आदि के बारे में लगातार अपना ज्ञान बढ़ाते रहने की कोशिश करते रहना चाहिये. पख़्तून को अपना दिमाग़ हमेशा नये विचारों के लिये खुला रखना चाहिये.

(झ) बुराई के ख़िलाफ़ जंग- अच्छाई व बुराई के बीच एक लगातार जंग जारी है. पख़्तून जहां कहीं भी वह बुराई देखे,यह उसका फ़र्ज़ है उसे उसके ख़िलाफ़ लड़ना चाहिये.

(न)हेवाद अर्थात मुल्क से प्यार–पख़्तून को हमेशा अपने पख़्तून देश से प्यार करना चाहिये. इसे सुधारने व मुक़म्मल बनाने की कोशिश करते रहना चाहिये. पख़्तून सभ्यता व संस्कृति की रक्षा करना चाहिये. किसी भी प्रकार के विदेशी हमले की स्थिति में पख़्तून ने अपने देश पख़्तूनख़्वा की हिफ़ाज़त करना चाहिये. देश की हिफ़ाज़त से तात्पर्य सभ्यता संस्कृति, परंपराएं, जीवन मूल्य आदि की हिफ़ाज़त करने से है

(प) दोद पासबानी- पख़्तून पर यह बंधनकारी है कि वह पख़्तून सभ्यता व सस्कृति की हिफ़ाज़त करे. पश्तूनवली यह सलाह देती है कि इसको सफलतापूर्वक करने के लिये पख़्तूनको अपनी  पश्तो ज़बान कभी नहीं छोड़ना चाहिये.पश्तो पख़्तून सभ्यता व संस्कृति को बचाने का मुख्य स्रोत है.

( जानकारी विकिपीडिया व अन्य स्त्रोतों से साभार प्राप्त की गयी)

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विश्वविजेता सिकंदर महान ने ईसा से ३३० पूर्व अपनी माँ को भेजे पत्र में पठानों के बारे में लिखा था ‘मैं इस समय शेर जेसे बहादुर लोगो के मुक़ाबिल हूँ.तूने एक शेर ही पैदा किया अफ़ग़ान ज़मीन का तो हर आदमी सिकंदर है.