डूबने वालों का मसीहा कोई है?

अंधों को चश्मे बांटने का दोर में

सूखे कुओं से पानी माँगने के सवाल

जवाब बन कर लोट रहे है.

प्रतिध्वनियों के पागल करते शोर में

चीत्कारों और कहकहों के बीच

कोई फर्क ही नहीं रहा.

विरक्त खारे समंदर का पानी

सरों के पार हुआ.

डूबते हुए अनगिनत हाथ

दूर जगमग साहिल की तरफ

अब भी आस से तक रहे हैं.

कोई है?

डूबने वालों का मसीहा कोई है.

नन्ही जड़ों का शोक-गीत

1

बरसात की रुत है

पोधारोपण कार्यकर्मों की धूम में

हमने पोधे रोपे.

नेताजी के साथ

फ़ोटो खिंचवा कर

मीडिया की तरफ दोड़ पड़े.

पानी देने कोई न रुका

पेड़ों को पानी पिलाने

कोई न लोटा.

हाँ, ज़रूर

बारिश की चंद गर्म बूँदें

गा रही थीं

नन्ही जड़ों का शोक-गीत.

2

बरसात की रुत है

पोधारोपण कार्यकर्मों की धूम में

बहुत पोधे लगाओ

नेता जी के साथ

फोटो भी खिंचवाओ

फ़ेसबुक पर खूब पोस्ट करो

अखबारों में भी दे आओ.

मगर यारो! कभी सोचा है?

मालिक की भेजी बरसात के सिवा

क्या कभी कोमल पोधों की

किसी ने सुध ली

क्या तुममें से किसी ने

एक लोटा भी इनको पानी दिया.

विकास के नाम पर

कितने पेड़ काटे गये

कितने दरख्तों का पुनःरोपण हुआ.

बड़े इस अपने शहर को

बेतरतीब बसाने के लिए हमने

कितने जंगलों का कत्लेआम किया.

कभी सोचना दोस्तों!

पोधे लगाना अच्छी बात है

उन्हें सीचना और भी अच्छी बात है

अनावश्यक कटते पेड़ बचाना

शायद सबसे अच्छी बात है.