Aside

 

 

 

बहुत भटके हैं वो मगर नहीं मिला

पडाव तो मिले हमें घर नहीं मिला

चोराहों में उलझ गयी मंजिलें मेरी

रास्ते का सुराग उम्रभर नहीं मिला

मुसाफिरों के सब वादे फरेब निकले

हमसफ़र कोई लोट कर नहीं मिला

लोग चोरी करके शाहकार रचा गये ……….. शाहकार-महानकीर्ति

हमारे ओजारों को हुनर नहीं मिला  

रास्ता तन्हा भी कट गया आलम

क्या हुआ जो हमसफर नहीं मिला  

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तेरी याद

तेरी याद

फूल की पंखड़ी पर ओस 

तितली के पंख का फेलाव

इन्द्रधनुष का सुहाना रंग

आँख से टपक गया आसू 

किनारे से टकरा कर लोटती लहर

न लोटने वाला वक़्त

पथरा गया इंतज़ार है 

तेरी याद मेरी सांस है

लम्हों की केद में

जल रही है अभी तो चल रही है.