तुम ये किस्सा कब समझोगे…

तुम यह किस्सा नहीं समझोगे

मगर जो हैं शिकारी

खाली पेट लतियाने  का खेल खूब जानते हैं.

उन्हें मालूम है

मॉस के टुकड़े में छिपा काँटा

भूख से बिलबिलाते पेटों के लिए

जिंदगी का हसीनतर इनाम है

मोत का लालच भरा निवाला.

उसी चारे के फरेब में फंसती हैं मछलियाँ

पानी में लगाये गये जालों का

उलझ गयी मछलियों को कब होता है पता.

फडफडाती दम तोड़ जाती हैं सब बेचारी

और शिकारियों के गोश्त-गोदाम

भरते जाते हैं

भरते ही जा रहे हैं.

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